करत-करत अभ्यास के जड़पति होता सुजान

अभ्यास का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। अभ्यास से जीवन में आशा के अनुरूप परिवर्तन आते रहते हैं। अभ्यास से यदि मूर्ख व्यक्ति भी चाहे तो समझदार बन सकता है।
जन्म से ही हर कार्य में कुशल व प्रवीण कम ही व्यक्ति होते हैं। हजारों में एकाध का नंबर आता है जो बिना किसी अभ्यास के ही कर कार्य में सफल हो जाते हैं। इसका भी शास्त्रीय अध्ययन करें तो यह उसके पिछले जन्म के पुण्य या परिश्रम या अभ्यास का ही प्रताप माना जा सकता है। खैर,… ।
मानव जीवन में प्रायः यह देखा गया है कि निरंतर अभ्यास से ही कार्य में कुशलता आती है। इसीलिए जीवन का निष्कर्ष किसी महापुरुष ने कुछ इस तरह से दिया है –
करत-करत अभ्यास के जड़पति होता सुजान।
रस्सी आवत-जात है, छोड़ देत सिला पर निसान।।
अब इस दोहे की अगर हम व्याख्या करने बैठेंगे तो निबंध की यह पुस्तक ही छोटी पड़ जाएगी। संक्षिप्त में हम इस का अर्थ समझ लेते हैं कि जिस तरह से बावड़ी की शिला पर बार-बार रस्सी बाल्टी से बंधी नीचे-ऊपर होती रहती है तो एक समय ऐसा आता है कि वह शिला भी रस्सी से हार मान अपने पर उसका निशान ले लेती है, यह एक सत्य कहावत है। उसी तरह अगर व्यक्ति भी बार-बार अभ्यास करे तो एक समय ऐसा आता है जब मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति भी समझदार बन जाता है।
यहाँ हम महाकवि वाल्मीकि का उदाहरण देखेंगे, महाकवि बनने से पहले वे एक मूर्ख व्यक्ति और डाकू थे। पर उनकी किस्मत जो वे राम-राम के स्थान पर उसका उल्टा मरा-मरा का उच्चारण अक्सर किया करते थे। एक दिन उनकी मुलाकात एक प्रतापी विद्वान से हुई जिसने उन्हें अकी गलती का अहसास करवाया और अभ्यास से राम-राम का उच्चारण करवाने लगा।
इसका फल यह निकला कि जो व्यक्ति राम-राम तक नहीं बोल पाता था उसने समय आने पर रामायण जैसा विशाल ग्रंथ ही लिख डाला।
ऐसे और भी कई उदाहरण हमें देखने को मिलेंगे, अगर हम आज के इस युग की बात करें तो हम स्वर कोकिला लता मंगेशकर की बात करेंगें। एक समारोह में उन्होंने बताया था कि उनकी रूचि संगीत में नहीं थी पर अपने परिवार के लिए उन्होंने संगीत का अभ्यास जो शुरु किया तो अभ्यास करते करते वे आज संगीत की मल्लिका ही बन बैठी।
आप किसी भी सफल व्यक्ति की जीवनी पढ़ें, हर सफल उद्यमी के पीछे भी अभ्यास का ही सहारा होता है।
हम इतना जरूर कह सकते हैं कि जिन-जिन ने निरंतर अभ्यास किया है, उनउन के सभी कार्य सफल हुए हैं।
आपका अपना जीवन भी एक उदाहरण है, कभी-न-कभी अपने भी अपने जीवन में अभ्यास का महत्व परखा होगा, फिर चाहे वह परीक्षा के दौरान पढ़ने से हो या बचपन में साइकिल चलाना सिखने से हो।।
इतिहास भी इस बात का साक्षी है कि अभ्यास से ही सफलता का मार्ग सशक्त किया जा सकता है। अभ्यास ही सफलता प्राप्त करने की सीढ़ी है। यही जीवन का मूल मंत्र है इसीलिए तो अंग्रेजी में एक कहावत

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