यदि मैं सीमान्त सिपाही होता

प्रस्तावना : भारत विशाल देश है। इसलिए इसका सीमांत भी अधिक विस्तृत है। इसके सीमांत के छोरों में बड़े-बड़े पहाड़, जंगल, मरुस्थल, नगर और सागर आदि हैं। चीन, पाकिस्ताने, बंगलादेश, नेपाल, बर्मा और तिब्बत आदि देशों की भूपटियाँ इसके सीमान्त छोरों पर पड़ती हैं।
सीमान्त की महत्ता : सुरक्षा की दृष्टि से सीमांत छोरों की अधिक महत्ता है; क्योंकि इन्हीं से परदेशियों का देश के भीतर प्रवेश करने का डर रहता है। इसके अलावा यदि सीमान्त के राष्ट्रों से किसी कारणवश शत्रुता हो जाए, तो ये हर प्रकार से चिन्ता का विषय बन जाते हैं, ऐसी स्थिति में शत्रु राष्ट्रों से अपने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सीमान्त की ओर ध्यान केन्द्रित करना पड़ता है। वहाँ पर सुरक्षा सैनिक लगाने पड़ते हैं। हमारे सीमान्त छोर बड़े ही मुसीबत वाले हैं। चीन और पाकिस्तान आदि देश छेड़छाड़ करते रहते हैं। इसलिए हम इनकी ओर पड़ने वाली विस्तृत भूपट्टियों पर शस्त्रों से सज्जित सेना को सतर्क रखते हैं। इससे हमें रक्षा में बहुत साधन लगाने पड़ रहे हैं। हमारे नेता बराबर शांति और मैत्री की अपील करते हैं। शिमला-समझौते पर चलने के लिए कहते हैं; किन्तु पाकिस्तान ऐसा हठधर्मी राष्ट्र है कि उस पर कुछ प्रभाव पड़ता ही नहीं। यह दिनोंदिन शत्रुता की ओर अग्रसर हो रहा है। कोई नहीं जानता कि इसकी शत्रुता व हठधर्मी का कहाँ अंत होगा ?
देश का एक सीमांत छोर : हमारे देश का राजस्थान का सीमांत छोर बहुत ही पास पड़ता है। यह क्षेत्र मरुस्थली होते हुए भी पाकिस्तान की दुष्टता से आतंकित है। कभी-कभी पाकिस्तानी सैनिक हमारे गाँवों में घुस कर पशुओं को हाँक ले जाते हैं। कभी-कभी चोरी से फसलें भी काट ले जाते हैं। कभी-कभी छोटा-मोटा हमला भी कर देते हैं। फलतः गाँवों में आतंक फैला रहता है। हमारे ग्रामीण डरे से रहते हैं। हमारे सिपाही भी कंधों पर बंदूक रखे, रात-दिन सीमान्त के आसपास बसे हुए ग्रामों की रक्षा करते हैं। कभी-कभी इनकी शत्रु सैनिकों से मुठभेड़ भी हो जाती है।
सीमांत के सिपाही का फर्ज : सीमांत के सिपाही का फर्ज है। कि वह शत्रु के सैनिकों को छेड़छाड़ करने पर और सीमा का अतिक्रमण करने पर बंदी बनाए तथा आक्रमण करने की स्थिति में गोलियों से भून दे। यदि आवश्यकता पड़े, तो देश की रक्षार्थ अपनी आहुति दे दे।
मेरी आकांक्षा : मेरी चिर अभिलाषा है कि मेरी नियुक्ति सीमांत पर हो जाए। मैं जैसलमेर की सीमा पर अपने फर्ज को पूरा करना चाहता हूँ। मैं बहुत दिनों से सेना में रह कर देश की सेवा कर रहा हूँ। मैं सदैव अधिकारियों से प्रार्थना करता रहता हूँ कि मेरी नियुक्ति सीमांत पर कर दें। काश ! ऐसा हो जाए।
उपसंहार : मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सीमांत की धरती बलिदान के लिए पुकार रही है। यदि इच्छा पूर्ण हो जाए, तो मैं उन पाकिस्तानी दस्युओं को मजा चखाऊँ जो रात्रि में घुसकर भारतीय पशुओं को चुरा कर ले जाते हैं। देखें, वह दिन कब आता है ?

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