आरोह अध्याय दो गद्य भाग

प्रश्न – मियां नसीरुद्दीन नानबाईयों  का मसीहा क्यों कहा जाता था?
उत्तर –
मियां नसीरुद्दीन कोई साधारण नानबाई नहींहै | वह खानदानी नानबाई हैं | उनके पास 56
प्रकार की रोटियां बनाने का हुनर है | तुनकी और रुमाली जैसी महीन रोटियां बनाना जानते
हैं | वह रोटी बनाने  को एक कला मानते हैं | वह अन्य नानबाईयों के मुकाबले में स्वयं को
श्रेष्ठ इसलिए मानते हैं क्योंकि नानबाई का प्रशिक्षण अपने परिवार की परंपरा से प्राप्त
किया | उनके पिता बरकत शाही नानबाई गढ़ैया वाले के नाम से प्रसिद्ध थे|और उनके बुजुर्ग
दादा भी यही काम करते थे|वह बादशाह को नई-नई चीजें बनाकर खिलाते थे और उनकी
प्रशंसा प्राप्त करते थे  मियां नसीरुद्दीन स्वयं 56 प्रकार की रोटियां बनाने के लिए प्रसिद्ध
थे | इसलिए उन्हें नानबाई का मसीहा कहा जाता था |
प्रश्न – लेखिका मियां नसरुद्दीन के पास क्यों गई थी ?
उत्तर –
लेखिका मियां नसरुद्दीन के पास इसलिए गई थी ताकि वे रोटी बनाने की कारीगरी को
जानने तथा उसेप्रकाशित करने के उद्देश्य से उनके पास गई थी | पत्रकार की हैसियत से
वहां गई थी उसने पूछा तो पता चला की यह खानदानी नानबाई मियां नसरुद्दीन की दुकान
है | जो कि 56 प्रकार की रोटियां बना लेते हैं | उनकी कारीगरी के रहस्य को जानने के
लिए उनके पास जाती हैं और उनको अलग-अलग तरह की रोटियां बनाने का प्रशिक्षण
कहां से मिला यह सारे सवालात पूछती हैं |
प्रश्न – बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही लेखिका की बातों से मियां नसरुद्दीन की
दिलचस्पी क्यों खत्म होने लगी?
उत्तर –
लेखिका ने जब मियां नसीरुद्दीन से उनके खानदानी नानबाई होने का रहस्य पूछा तो उन्होंने
बताया कि उनके पिता शाही नानबाई गढ़ैया वाले के नाम से और दादा आला नानबाई के
नाम से प्रसिद्ध थे|उनके बुजुर्ग बादशाह के लिए भी रोटियां बनाते थे | एक बार बादशाह ने
उनके बुजुर्गों को ऐसी चीज बनाना बनाकर खिलाने के लिए कहा जो नाग से पक्के न पानी
से बने उन्होंने ऐसी चीज बादशाह को बनाकर खिलाई और बादशाह भी कि जब लेखिका
ने बादशाह का नाम पूछा तो वह नाराज हो गए | क्योंकि उन्हें बादशाह का नाम स्मरण ही
नहीं था | बादशाह का  बावर्ची होने की बात उन्होंने अपने परिवार की बड़ाई करने के लिए
गई थी | बादशाह का प्रसंग आती है बेरुखी दिखाने लग गए |
प्रश्न – पाठ में मियां नसरुद्दीन का शब्द चित्र लेखिका ने कैसे खींचा
उत्तर –
लेखिका के अनुसार मियां नसरुद्दीन 70 वर्ष के हैं| वह चारपाई पर बैठे हुए बीड़ी का मजा
ले रहे थे | मौसम की मार से उनका चेहरा  पक गया है | उनकी आंखों में काइयां भोलापन
परेशानी पर मंजू हुए कारीगर के तेवर थे | अखबार वाले उन्हें निठल्ले लगते हैं और वह 56
प्रकार की रोटियां बनाने में प्रसिद्ध भी हैं उन्होंने नाम भाइयों का परीक्षा प्रशिक्षण उन्होंने
अपने पिता से लिया था जब बात उनके हाथ से निकल जाए तो वह खीज भी जाते थे |
और पलट कर जवाब नहीं देते थे बात को पलट भी देते थे |

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